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पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी को लेकर आक्रामक हुई कांग्रेस….भाजपा अपने दागदार चेहरों के विकल्प नौकरशाहों में ढूंढ रही….भाजपा जिस “फेयर-क्रीम” का इस्तेमाल करने जा रही है उसका खुद का रिकार्ड भी खराब : कांग्रेस

पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी के भाजपा प्रवेश के बाद अब कांग्रेस आक्रामक तेवर में नजर आ रही है | भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़ के पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी को भाजपा प्रवेश करवाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जिस बेताबी से समूची भाजपा ने एक पूर्व  नौकरशाह को अपने दल में शामिल करने के लिए पलक पांवड़े बिछाया हुआ है । उनको प्रदेश नेतृत्व के बजाय राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष प्रवेश कराया गया उससे यह साफ हो रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व का छत्तीसगढ़ के वर्तमान भाजपा नेताओं पर से विश्वास उठ गया है इसी लिए भाजपा आलाकमान के लोग राज्य नेतृत्व के दागदार चेहरों का विकल्प तलाश रहे हैं ।

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भाजपा के शीर्ष नेताओं की यह कवायद फिजूल साबित होने वाली है । पिछले 15 सालो से राज्य में सरकार चला रहे भजपा नेताओ के चेहरों में नान, पनामा, अगस्ता, झलकी भदौरा, झीरम, सरीखे इतने बदनुमा दाग लग चुके है, जो ओपी चौधरी रूपी फेयरलवली क्रीमों से साफ नही होने वाले । भाजपा नेतृत्व जिस फेयर क्रीम का इस्तेमाल करने जा रही है उसका खुद का रिकार्ड भी खराब है । छत्तीसगढ़ विशेष कर राजधानी रायपुर की जनता ने देखा है किस प्रकार चौधरी के सनक के कारण ऑक्सीजोन के नाम पर 70 से अधिक लोगों की रोजी रोटी छीन कर उनकी दुकानों पर बेदर्दीपूर्वक बुलडोजर चलवाया गया ।

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कमीशनखोरी के चलते स्काई वाक के नाम पर रायपुर की सड़कों पर औचित्यहीन निर्माण करवाया गया । कलेक्टर रहते चंद भाजपा नेताओं को लाभ पहुचाने राजस्व नियमो में जानबूझकर पेचीदगियां बढ़ा कर आम नागरिकों की जमीनों मकानों की रजिस्ट्रियों पर रोक लगवाया गया है । नगर निगम रायपुर के कमिश्नर रहते जो अधिकारी पार्षदों जनप्रतिनिधियों को घण्टो इंतजार करवाता था जो कलेक्टर जनदर्शन में खुद लोगो का आवेदन नही स्वीकार करता था, मातहत अधिकारियों अतरिक्त कलेक्टर से लोगो का आवेदन स्वीकार करता था उसके मुंह से जनसेवा की बाते राज्य लोग भली भांति समझ रहे है ।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पहले भाजपा सरकार में प्रशासनिक आतंकवाद हावी था अब राजनैतिक दल भाजपा में प्रशासनिक कब्जेधारी शुरू हो गयी । पिछले पंद्रह वर्षो छतीसगढ़ में भाजपा नेताओं और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का नापाक गठबंधन बन गया था ये अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे थे तथा अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन नही कर रहे थे, राज्य में भाजपा सरकार के खिलाफ बने वातावरण और 2018 के चुनाव में भाजपा सरकार के पतन को देख कर ऐसे लोग राजनैतिक सरंक्षण की तलाश में भाजपा को शरण स्थली के रूप में देख रहे है।

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