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बड़ी खबर : अडानी विवाद पर भूपेश सरकार का बड़ा फैसला…..वनों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने का आदेश, 2014 में मंजूरी के लिए हुए ग्राम सभा की होगी जांच…भारत सरकार को पत्र लिखेगी छत्तीसगढ़ सरकार

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के हित में बड़ा फैसला लिया है, सीएम भूपेश ने नंदराज पर्वत और उसके आसपास होने वाली पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए निर्देश दिया है, साथ ही खनन और वनो की कटाई को मंजूरी दी जाने वाली फर्जी ग्रामसभा की जाँच करने का आदेश दिया है |

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बता दें कि सीएम भूपेश द्वारा बैलाडीला में खदान की खुदाई को लेकर आदिवासियों के आंदोलन पर पहल की गई थी, जिसके बाद आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल बस्तर के सांसद दीपक बैज के साथ आज सीएम भूपेश से मुलाकात की | मुलाकात के बाद सीएम भूपेश ने बस्तर सांसद दीपक बैज और विधायकों के साथ बैठक की इस बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर भी मौजूद थे |

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बैठक में बड़ा निर्णय लेते हुए सीएम भूपेश ने नंदराज पर्वत और उसके आसपास होने वाली पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए निर्देश दिया है, साथ ही खनन और वनो की कटाई को मंजूरी दी जाने वाली फर्जी ग्रामसभा की जाँच करने का आदेश भी दिया है | मुख्यमंत्री के आदेश के बाद तत्काल पेड़ों की कटाई को रोक दी गयी है | साथ इस मुख्यमंत्री भूपेश बघेल MOU को लेकर बस्तरवासियों की भावनाओं को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार भारत सरकार को पत्र लिखेगी और जनता की भावनाओं की जानकारी देगी।

बता दें कि जल, जंगल, जमीन के लिए सालों से लड़ाई लड़ रहे है आदिवासी समाज ने अब अपनी इष्ट देव पहाड़ी पहाड़ को बचाने के लिए अडानी की कंपनी को एनएमडीसी के 13 नंबर लोह अस्यक खदान देने के विरोध में हल्ला बोल दिया है, पिछले 5 दिनों से किरंदुल में लगातार आदिवासियों का विरोध प्रदर्शन चल रहा था। हजारों के तादाद में आदिवासियों ने एनएमडीसी के चेकपोस्ट को घेरा हुआ ही और वहां धरना प्रदर्शन कर रहे है | वही इस विरोध प्रदर्शन को पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी समेत सामाजिक कार्यकर्ता के अलावा नक्सलियों ने भी अपना समर्थन दिया है |

बताया जा रहा है कि अडानी ग्रुप ने सितंबर 2018 को बैलाडीला आयरन ओर माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी बीआईओएमपीएल नाम की कंपनी बनाई और दिसंबर 2018 को केन्द्र सरकार ने इस कंपनी को बैलाडीला में खनन के लिए 25 साल के लिए लीज दे दी |
बैलाडीला के डिपॉजिट 13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण क्लियरेंस दिया है, जिस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार की सीएमडीसी को संयुक्त रूप से उत्खनन करना था, इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच हुए करार के तहत संयुक्त उपक्रम एनसीएल का गठन किया गया था |

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