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IAS के ट्रांसफर के लिए सवा करोड़ की डील, पत्रकार समेत तीन गिरफ्तार….लॉकडाउन के चलते नहीं हो पाई थी मनचाही तैनाती

एक आईएएस अधिकारी को कानपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाने के लिये सवा करोड़ रुपये की डील करने के आरोपी पीयूष अग्रवाल के साथ साठगांठ में शामिल गौरी शंकर दीक्षित और कमलेश को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। ट्रांसफर-पोस्टिंग के फर्जीवाड़ा मामले में योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आबकारी विभाग के विशेष सचिव ईश्वरचंद्र पांडेय को उनके पद से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दियाहै। आईएएस पांडेय का नाम पिछले दिनों ट्रांसफर पोस्टिंग के सौदे में उछला था। दो लोगों के बीच का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद शासन ने इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी। एसटीएफने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के मुताबिक, एसटीएफ की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ही शासन ने आईएएस पांडेय पर कार्रवाई की है।

गाजियाबाद का रहने वाले गौरीशंकर दीक्षित आईएएस का रिश्तेदार है और कमलेश के साथ एक ही कालोनी में रहता था। गौरीशंकर ने खुलासा किया कि डील में उसका और कमलेश का भी हिस्सा था। तबादला न होने पर गौरीशंकर मुख्य आरोपी पीयूष से रुपये वापस मांग रहा था। रुपये न मिलने पर ही उसने कमलेश व पीयूष के बीच बातचीत का आडियो वायरल करा दिया था। एसटीएफ के अफसरों का कहना है कि इस मामले में आगे भी कार्रवाई हो सकती है। इसके लिये शासन को कई तथ्यों से अवगत करा दिया गया है।

इस प्रकरण की जांच 15 मई को एसटीएफ को सौंपी गई थी। इस पर एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश और प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह ने अपनी टीम के साथ तथ्य जुटाये थे। इसके बाद ही 21 मई को एसटीएफ ने गाजियाबाद के राजनगर विस्तार स्थित सृष्टि अपार्टमेंट निवासी पीयूष अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। पीयूष ने एसटीएफ के सामने कई खुलासे किये थे। एसटीएफ को पता चला कि गौरीशंकर और कमलेश भी लखनऊ आये हुए है। कमलेश विजयंतखंड में रहता है जबकि गौरीशंकर का बाराबंकी में भी मकान है। इस पर एसटीएफ ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

ये तस्वीर पीयूष अग्रवाल की है। इसे ट्रांसफर पोस्टिंग विवाद में एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है।

गौरीशंकर ने कुबूला-डील में शामिल था

एसटीएफ के मुताबिक गौरी शंकर दीक्षित ने कुबूला कि पीयूष से एक करोड़ रुपये में डील हुई थी लेकिन उसने आईएएस को सवा करोड़ रुपये देने पर केडीए का वीसी पद मिलने की बात कही थी। 25 लाख रुपये उसके और कमलेश के बीच बंटने थे। उसे तबादला होने का पूरा यकीन हो गया था, इसलिये उसने दूसरे से 15 लाख रुपये का इंतजाम कर पीयूष को दिये थे। उसी समय पीयूष ने गौरीशंकर व कमलेश को दो-दो लाख रुपये दे दिये थे। बाद में पीयूष ने लॉक डाउन की वजह से काम न होने की बात कही तो गौरीशंकर अपने रुपये मांगने लगा था। रुपये वापस न करने पर ही गौरीशंकर ने पीयूष व कमलेश के बीच बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल करा दिया था। एसटीएफ ने बताया कि गौरीशंकर, पीयूष व कमलेश पहले भी लोगों से रुपये ऐंठ चुके थे।

पीयूष इस गिरोह का सरगना

पीयूष अग्रवाल ट्रांसफर पोस्टिंग गिरोह का सरगना है। एसटीएफ की पूछताछ में गौरीकांत दीक्षित ने बताया कि वोऔर पीयूष अग्रवाल गाजियाबाद की एक ही सोसाइटी में रहते हैं। दीक्षित ने बताया कि पीयूष अग्रवाल सामाजिक कार्यकर्ता और एक चैनल का पत्रकार है, दोनों मिलकर अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग कराने के नाम पर ठगी का काम करते हैं। लखनऊ के कमलेश सिंह से एक आईएएस अफसर को कानपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनवाने की 1.25 करोड़ रुपए में डील हुई थी और 25 लाख रुपए हम तीनों को आपस में बांटने थे।

लॉकडाउन के चलते नहीं हो पाई थी तैनाती

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते पूरे देश में लॉकडाउन घोषित है। इस बीच कानपुर विकास प्राधिकरण में वीसी का पद दिलवाने के नाम पर आईएएस अधिकारी से 1.25 करोड़ की डील करने वाले गाजियाबाद के कथित पत्रकार पीयूष अग्रवाल, गौरीकांत व कमलेशको यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। यूपी एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि बीते दिनों एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था,जिसमें एक आईएएस अधिकारी को कानपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाने की बात चल रही थी और इस बाबत 1.25 करोड़ रुपए में डील और 15 लाख रुपए एडवांस लिए जाने का भी जिक्र था। एसटीएफ ने इस मामले में गाजियाबाद के रहने वाले गौरीकांत दीक्षित और लखनऊ के कमलेश सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया है।

गौरीकांत ने वायरल किया ऑडियो

2 मार्च को इस काम के लिए एडवांस के तौर पर कमलेश ने पीयूष अग्रवाल को 15 लाख रुपए दिए थे,जिसमें से पीयूष ने 2 लाख रुपएकमलेश को नगद दिए। 2 लाख रुपए गौरीकांत के अकाउंट में ट्रांसफर किया,बाकी 11 लाख रुपएलेकर वह गाजियाबाद चला गया था,लेकिन उसके बाद ही लॉकडाउन हो गया और पीयूष अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके पोस्टिंग नहीं करा पाया। इधर, कमलेश ने पोस्टिंग नहीं होने पर गौरीकांत और पीयूष ने तगादा शुरू कर दिया। गौरीकांत के कहने पर कमलेश ने पीयूष को फोन किया और दोनों के बीच हुई पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया,जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग और पैसों के लेनदेन का ज़िक्र था। उस ऑडियो क्लिप को गौरीकांत ने वायरल करा दिया, जो पुलिस, प्रशासन तक पहुंच गई। इसके बाद गिरोह का भंडाफोड़ हुआ और तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक अब वो आईएएस अफसर भी जांच के घेरे में हैं, जिनको केडीए वीसी बनाने की डील हुई थी।

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