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CWC की बैठक में सोनिया गांधी की G-23 को फटकार, कहा- मैं ही पार्टी की स्थायी अध्यक्ष हूं, मीडिया के जरिये मुझसे बात न करें

कांग्रेस पार्टी के स्थाई अध्यक्ष पद को लेकर चल रही बहस पर फिलहाल सोनिया गांधी ने विराम लगा दिया है। शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उन्होंने साफ किया कि वह ही कांग्रेस की स्थायी अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने हर मामले को गंभीरता से सुना और सुलझाया है। मीडिया के जरिए उनसे बात करने की जरूरत नहीं है।

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उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर विशेषतौर पर युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। चाहें वह किसानों का मुद्दा हो, महामारी के दौरान राहत पहुंचाना हो या फिर युवाओं व महिलाओं का मुद्दा हो। लखीमपुर हिंसा पर उन्होंने कहा कि यह घटना भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है।

52 नेता हैं मौजूद
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जारी है। इस बैठक में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अशोक गहलोत, आनंद शर्मा समेत पार्टी के 52 वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। बैठक में वर्तमान राजनीतिक स्थिति, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा होगी।

मनमोहन सिंह व दिग्विजय सिंह समेत पांच नेता अनुपस्थित
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बीमारी के चलते हिस्सा नहीं ले रहे हैं। बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना भी की। इसके अलावा वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह समेत पांच नेता बैठक में अनुपस्थित हैं।

वरिष्ठ नेताओं ने उठाई थी मांग
पिछले दिनों कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की थी। यहां तक कि कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई जाए और पार्टी के संगठनात्मक चुनाव और आतंरिक मामलों पर चर्चा की जाए।

पार्टी अध्यक्ष को लेकर उठ रहे थे सवाल
कांग्रेस में स्थाई पार्टी अध्यक्ष का न होना उसके लिए परेशानी की वजह बन रहा है। पार्टी के अंदर ही इसको लेकर विरोध के शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने तो यहां तक कह दिया था कि पार्टी का कोई अध्यक्ष नहीं हैं। फैसले कौन ले रहा है, मालूम नहीं है।

सोनिया गांधी हैं अंतरिम अध्यक्ष
हालफिलहाल सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं। राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद उन्होंने अध्यक्ष का पदभार संभाला था, लेकिन स्थाई अध्यक्ष की मांग पार्टी ही नहीं पार्टी के बाहर भी होने लगी है। पिछले दिनों शिवसेना ने भी स्थाई अध्यक्ष को लेकर सवाल खड़े किए थे।

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