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IAS जनक पाठक को मिली अग्रिम ज़मानत, महिला से दुष्कर्म के आरोप में फरार हैं आईएएस जनक, जानिए क्या है पूरा मामला

जांजगीर-चांपा में पूर्व में कलेक्टर रहे फरार निलंबित आईएएस जनक प्रसाद पाठक को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है। जनक पर महिला के साथ काम दिलाने के नाम पर दैहिक शोषण करने का आरोप है । मामले के सामने आने के बाद 3 जून से जनक पाठक फरार है । जनक की तरफ से हाईकोर्ट में अधविक्ता शशांक ठाकुर, आशुतोष पांडेय एवं हिमांशु सिंहा ने पैरवी की, इस पर सुनवाई अरविंद सिंह चंदेल की एकलपीठ में अंतिम सुनवाई MCRCA 774/2020 हुई जिसमें मामले की सुनवाई के पश्चात माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह कहते हुए अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान किया की पूरे FIR को पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि FIR देर से दर्ज की गई जो कि मामले को कमजोर करता है, मामले की कहानी विश्वनीय प्रतीत नहीं होती है। राज्य शासन की ओर से अतरिक्त महाअधिवक्ता विवेक रंजन तिवारी ने आपत्ति दर्ज की ।

ये आरोप लगे थे

पीड़ित महिला के मुताबिक वह पहली बार 13 मार्च को एनजीओ के काम से तत्कालीन कलेक्टर जनक प्रसाद पाठक से उनके चैंबर में मिली थी। अपने काम के बारे में बताने के बाद कलेक्टर ने उसका मोबाइल नंबर लिया था। महिला का आरोप है कि इसके बाद आईएएस पाठक उसे फोन करने लगे। वाॅट्सएप कॉल भी करते थे। अश्लील मैसेज और अश्लील वीडियो भी भेजना शुरू कर दिया। महिला ने वे सारे चैट के स्क्रीनशॉट पुलिस को सौंपे थे।

आरोप है कि वे लगातार महिला को बुला रहे थे, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण उसने आने में असमर्थता जताई। इस पर कलेक्टर पाठक ने महिला के पति को नौकरी से निकालने की धमकी दी।

महिला का कहना है कि वह 15 मई को फिर से अपने काम के सिलसिले में पाठक से मिलने के लिए कलेक्टरेट गई थी। आरोप है कि बातों के दौरान ही कलेक्टर ने उसे पकड़ लिया और चैंबर के अंदर बने कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

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