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किसानों को जेल भेजने के मामले में गरमाई प्रदेश की राजनीति!….BJP किसान मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने भूपेश सरकार पर साधा निशाना, कहा- किसान विरोधी भूपेश सरकार, निर्दोष किसानों को जल्द रिहा करें…BJP ने पूरे मामले के जाँच के लिए गठित की जाँच दल

प्रदेश के किसानों को जेल भेजने का मामला अब राजनीति तूल पकड़ने लगी है, पिछले दिनों बस्तर संभाग के दो किसानों को कर्ज के मामले में जेल भेजे जाने के बाद विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर हमला बोल रहे है | बीजेपी किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार को आड़े हाथो लेते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही पुरे मामले की जाँच के लिए बीजेपी ने जाँच दाल भी गठित कर दी है, जाँच दल पांचों संभाग में जांच करके अपना रिपोर्ट  किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगी |

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बता दें कि बस्तर संभाग के दो किसानों को लोन नहीं पटाने के नाम पर जेल भेज दिया गया था, इसके बाद पीड़ित किसानों के परिवार ने बैंक के साथ दो लोगों पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए बस्तर कलेक्टर से न्याय की मांग की थी, वही ये मामला सामने आने के बाद डीजीपी डीएम अवस्थी ने बस्तर के सभी एसपी को पत्र लिखकर इस तरह के ठगी मामलों की करवाई करने के निर्देश दिए है |

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वही कर्ज के मामले में जेल भेजे गए किसानों के मामले में जिला प्रशासन बस्तर द्वारा इस मामले की जांच अनुविभागीय दण्डाधिकारी के माध्यम से कराई जा रही है। जांच में प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला आ रहा है। जांच पूरी होते ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही किसानों को जमानत के माध्यम से राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिला प्रशासन द्वारा नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

वहीं जेल गए किसानों के परिजनों ने कलेक्टर को बताया था कि गांव के ही दो लोगों ने ड्रिप इरिगेशन के नाम पर उनसे सादे कागज पर अंगूठा लगवाया था। बाद में एक को 40 हजार और दूसरे को 60 हजार रुपए मिले। बैंक से वसूली का नोटिस आया तो पता चला कि सुखदेव पर 4 लाख और तुलाराम पर 10 लाख रुपए का कर्ज है।

ये है पूरा मामला
बस्तर ब्लॉक में एजेंटों ने खेती के लिये ड्रिप दिलवाने के नाम से किसानों को बैंक से लोन दिलाया था, और उन्हें बैंक के दस्तावेजों पर अंगूठा लगाकर रकम हासिल कर लिया था, इस बारे में लगातार किसान बैंक से यह पूछते रहे कि उन्हें कितना लोन दिया गया है, लेकिन बैंक की ओर से उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया, बल्कि इसके बाद लोनधारी किसानों को चेक बाउंस के नाम पर जेल भेज दिया गया, बैंक से लगातार किसानों को लोन अदा करने के लिये नोटिस दिया गया लेकिन किसानों को जब पता चला कि उनका कर्ज लाखों में हैं तो उनके होश उड़ गये. उसके बाद बैंक द्वारा चेक बाउंस को लेकर उन्हें पेशी में बुलाया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया |

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