गोठ-बात व्यक्ति विशेष

दाऊ दुलार सिंह मंदराजी के किरदार निभाना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी….मंदराजी अपने समय के माइकल जैक्सन थे….करन खान

नाचा के भीष्मपितामह दुलार सिंह मंदराजी के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म मंदराजी का पोस्टर जारी हो गया है | पोस्टर जारी होने के बाद से ही इस फिल्म को लेकर लोगों में काफी क्रेज देखा जा रहा है, सोशल मीडिया पर पोस्टर को काफी पसंद किया जा रहा है, इस फिल्म में दुलार सिंह मंदराजी के किरदार निभा रहे अभिनेता करन खान ने बताया कि मंदराजी दाऊ समर्पण और साधना के पर्याय थे, उनके जीवन में तमाम उतार-चढ़ाव आने के बाद भी उन्होंने नाचा को छत्तीसगढ़ में स्थापित किया, दाऊ जी ने अपनी जिंदगी में धन नहीं कमाया बल्कि अपनी संपत्ति को गंवाया। इसके एवज में उन्होंने सिर्फ नाम कमाया जो बहुधा लोगों के लिए मुश्किल होता है। इस फिल्म में मंदराजी के जिंदगी के ऐसे कई पहलू है जो दर्शकों को देखना और जानना चाहिए |

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इस फिल्म में मंदराजी का किरदार निभा रहे अभिनेता करन खान से फिल्म से जुड़े बातचीत

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सवाल – आपकी अगली फिल्म नाचा के भीष्मः पितामह दाऊ दुलार सिंह मंदराजी के बायोपिक फिल्म की पोस्टर जारी होने के बाद इस फिल्म की काफी चर्चा हो रही है, जिसमें आपके गेटअप को भी काफी पसंद किया जा रहा है, दाऊ दुलार सिंह के किरदार निभाना ये आपके लिए कितना चुनौती भरा रोल था |

जवाब- दाऊ दुलार सिंह मंदराजी के किरदार निभाना यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी, मंदराजी की किरदार निभाना मेरे लिए काफी चुनौती पूर्ण था, लेकिन एक अभिनेता होने के नाते शुरू से हटकर दर्शको के सामने कुछ नया लाने का प्रयास करता हूं | इस फिल्म के लिए मैंने काफी मेहनत की है, दर्शकों को मंदराजी फिल्म और मेरी किरदार जरूर पसंद आएगी |

 

सवाल-  बायोपिक फिल्म मंदराजी के बारे में आपसे कुछ जानना चाहेंगे | 

जवाब- फिल्म अपने आप में एतिहासिक है, यह छत्तीसगढ़ की पहली बायोपिक फिल्म है, दाऊ दुलार सिंह मंदराजी अपने समय के माइकल जैकसन थे, जब उनके शो होता था तो सिनेमा बंद हो जाती थी, मंदराजी ने अपनी पूरी जिंदगी तन मन धन सब कुछ कला को समर्पित कर दिया था |  छत्तीसगढ़ में नाचा की शुरुवात की, कलाकारों को संगठित किया. बहुत से कलाकारों को नेमफेम दिया, उनके पास करोंडो की संपति थी, लेकिन उनके अंतिम समय में उनके पास कफ़न के लिए पैसे नहीं थे मंदराजी के बारे में नए पीढ़ी को जानना जरुरी है | 

सवाल – आज दुलार सिंह जी होते तो छत्तीसगढ़ में नाचा की स्थिति कैसी होती |

जवाब- समय के साथ सब बदल जाता है, उस समय सोशल मीडिया नहीं था, आज यूट्यूब का जमाना है, उस समय मनोरंजन के लिए छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए नाचा ही एक माध्यम था | 

सवाल- अगर आने वाले समय में फिर से बायोपिक फिल्म बनाई जाती है, तो आप छत्तीसगढ़ के ऐसे कौन से विभूति के किरदार को निभाना चाहेंगे | 

जवाब- ऐसे तो छत्तीसगढ़ में हबीब तनवीर, खुमान साव जैसे कई विभूति है, जिन पर बायोपिक फिल्म बनाई जा सकती है, लेकिन शहीद वीर नारायण सिंह पर बायोपिक करना मेरी दिली इच्छा है |

सवाल- आज हिंदी फिल्मो के जैसे छत्तीसगढ़ी फिल्म भी कमर्शियल हो गई है, ऐसे में मंदराजी ऊपर फिल्म बनाने का ख्याल कैसे आया | 

जवाब- इस फिल्म के निर्माता निर्देशक को मै सलाम करता हूं, जिन्होंने इतनी रिस्की विषय को चुना, इस फिल्म का सफल होना बहुत जरुरी है, अगर ये फिल्म सफल हो जाती है, तो आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में प्रदेश के और भी विभूतियों पर बायोपिक फिल्म बनना शुरू हो जाएगी |

सवाल- एक सुपर स्टार, कलाकार, निर्देशक  के रूप में आपके कौन-से सपने अभी भी अधूरे हैं | 

जवाब- मेरा सुपर स्टार बनना ही अभी बाकी है, अभी बना नहीं हूं, सुपरस्टार तो बहुत दूर की बात है, मैं अपने आप को स्टार भी नहीं मानता, फ़िलहाल मैं एक कलाकार बनने का प्रयास कर रहा हूं | अगर मैं सुपरस्टार की दौड़ में शामिल होता तो मंदराजी जैसे फिल्म नहीं कर पाता | 

सवाल – साठ के दशक के फिल्म को इस दशक में करना, इस फिल्म के शॉट से जुडी ऐसी कोई यादें जिससे आप शेयर करना चाहते है |

 जवाब- साठ के दशक में ज्यादा लाइट नहीं होती थी, तो लोग पूरे रात भर नाचा केंडल मशाल जलाकर देखा करते थे, और इस फिल्म में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है, फिल्म में एक भी बिजली के खम्भे को नहीं दिखाया गया है |

सवाल- बताया जाता है कि दुलार सिंह जी अपने नाचा के माध्यम से आजादी के समय लोगों को जागरूक किया करते थे,  जिसके कारण अग्रेजों ने उनके नाचा पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था | 

जवाब- दाऊ दुलार सिंह मंदराजी अपने नाचा के माध्यम से आजादी के अलख जलाते थे, इस बात की जानकारी जब अंग्रेजों को पता चला तो मंदराजी के पार्टी के साथ दुर्व्यहार किया गया, मंदराजी के साथ मारपीट किया गया था, इस फिल्म में भी उस सीन को निर्देशक ने बखूबी से फिल्माया है | 

सवाल- इस फिल्म के गीत संगीत के बारे में कुछ बताइये |

जवाब- पारम्परिक गीत-संगीत से पूरी फिल्म सजी है, दो दशक के बाद सबसे सर्वश्रेष्ठ गीत संगीत है, इस फिल्म में लक्ष्मण मस्तुरिया जी के भारत मा के रतन बेटा गीत को भी सुनने को मिलेगा | 

सवाल- आने वाले पीढ़ी को क्या सन्देश देना चाहेंगे |

जवाब- आने वाली पीढ़ी से मैं यही कहना चाहूंगा छत्तीसगढ़ी फिल्म को, लोक गीत संगीत को, कलाकार को अपना प्यार आशीर्वाद नए पीढ़ी को देना बहुत जरुरी है | आधुनिक संस्कृति के पीछे हमारे छत्तीसगढ़ के युवा न भागे, जो रस नाचा में है, पंडवानी, सुवा , गम्मत, कर्मा दरिया पंथी सुवा में है, वो रस कही नहीं मिलेगा |  यहाँ के युवा छत्तीसगढ़ के कला संस्कृति से जुड़े रहे | 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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